श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 7: तृणावर्त का वध  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  10.7.16 
गाव: सर्वगुणोपेता वास:स्रग्रुक्‍ममालिनी: ।
आत्मजाभ्युदयार्थाय प्रादात्ते चान्वयुञ्जत ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
नंद महाराजा ने अपने पुत्र श्री कृष्ण की समृद्धि के लिए ब्राह्मणों को गायें यह कहते हुए दान में दी कि ये गायें विशेष रूप से वस्त्रों, फूलों की मालाओं और सुनहरे हारों से सुसज्जित हैं। ये गायें दूध दुहने में सबसे योग्य हैं और ब्राह्मणों को दान में दे दी गई हैं। ब्राह्मणों ने उन्हें स्वीकार कर लिया और पूरे परिवार को, विशेषकर श्री कृष्ण को आशीर्वाद दिया।
 
Nanda Maharaja, for the sake of his son's wealth, donated cows to the brahmanas which were adorned with clothes, flower garlands and golden necklaces. These cows which gave abundant milk were donated to the brahmanas and the brahmanas accepted them. In return, they blessed the entire family and especially Krishna.
तात्पर्य
नंद महाराज ने पहले ब्राह्मणों को सुस्वाद भोजन खिलाया और फिर उन्हें दान में श्रेष्ठ गायें दीं जो कि ज़रदोज़ी के गले के हार, वस्त्र और फूलों की मालाओं से सजी हुई थीं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)