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bhagavat 10.69.34: कहीं वह देवताओं की विस्तृत यज्ञों से पूजा कर रहे थे और कहीं वह जनकल्याण कार्य जैसे कुएँ, जन उद्यान और मठ बनाकर अपना धार्मिक कर्त्तव्य पूरा कर रहे थे।   |   bhagavat अध्याय 10.69: नारद मुनि द्वारा द्वारका में भगवान्   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 69: नारद मुनि द्वारा द्वारका में भगवान्  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  10.69.34 
यजन्तं सकलान् देवान् क्व‍ापि क्रतुभिरूर्जितै: ।
पूर्तयन्तं क्व‍‍चिद् धर्मं कूर्पाराममठादिभि: ॥ ३४ ॥
 
 
अनुवाद
कहीं वह देवताओं की विस्तृत यज्ञों से पूजा कर रहे थे और कहीं वह जनकल्याण कार्य जैसे कुएँ, जन उद्यान और मठ बनाकर अपना धार्मिक कर्त्तव्य पूरा कर रहे थे।
 
At some places they were worshipping the gods by performing elaborate yagyas and at other places they were fulfilling their religious duties by doing public welfare works like building wells, public parks and monasteries.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)