श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 69: नारद मुनि द्वारा द्वारका में भगवान्  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  10.69.28 
कुत्रचिद्‌‌द्विजमुख्येभ्यो ददतं गा: स्वलङ्कृता: ।
इतिहासपुराणानि श‍ृण्वन्तं मङ्गलानि च ॥ २८ ॥
 
 
अनुवाद
कहीं वे उत्तम ब्राह्मणों को बड़े ही भलीभाँति से सजाई गयी गायें दान दे रहे थे और कहीं महाकाव्यों के इतिहासों और पुराणों के शुभ वृत्तान्त सुन रहे थे।
 
Somewhere he was donating well-decorated cows to the best of brahmanas and somewhere he was listening to auspicious narrations of epic histories and Puranas.
तात्पर्य
श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती हमें बताते हैं कि गौदान करना प्रातः काल में होता है जबकि इतिहास सुनना दोपहर में होता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)