श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 68: साम्ब का विवाह  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  10.68.9-10 
विस्फूर्ज्य रुचिरं चापं सर्वान् विव्याध सायकै: ।
कर्णादीन् षड्रथान् वीरस्तावद्भ‍िर्युगपत् पृथक् ॥ ९ ॥
चतुर्भिश्चतुरो वाहानेकैकेन च सारथीन् ।
रथिनश्च महेष्वासांस्तस्य तत्तेऽभ्यपूजयन् ॥ १० ॥
 
 
अनुवाद
वीर साम्ब ने अपना अद्भुत धनुष टनकारते हुए कर्ण आदि छहों योद्धाओं पर बाण चलाए। उसने प्रत्येक रथ को एक-एक बाण, चार घोड़ों के झुंड को चार-चार बाण और प्रत्येक सारथी को एक-एक बाण से बेधा। उसने रथों की बागडोर संभालने वाले महान धनुर्धरों पर भी प्रहार किया। शत्रु योद्धाओं ने साम्ब के इस पराक्रम प्रदर्शन के लिए उसे बधाई दी।
 
Twanging his wonderful bow, the brave Samb attacked the six warriors including Karna with arrows. He pierced the six chariots with the same number of arrows, the four teams of horses with four arrows and each charioteer with one arrow. In the same way, he also attacked the great archers (charioteers) who were handling the reins of the chariots. The enemy warriors congratulated Samb for this display of valour.
तात्पर्य
श्रील प्रभुपाद ने टिप्पणी की है: "सांबा द्वारा अकेले छह महान योद्धाओं से इतनी मेहनत से लड़ने पर, उन सबने उस लड़के की अकल्पनीय शक्ति को सराहा। लड़ाई के बीच में भी, उन्होंने यह खुले दिल से स्वीकार किया कि यह लड़का सांबा अद्भुत है।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)