सोऽपविद्ध: कुरुश्रेष्ठ कुरुभिर्यदुनन्दन: ।
नामृष्यत्तदचिन्त्यार्भ: सिंह क्षुद्रमृगैरिव ॥ ८ ॥
अनुवाद
हे कुरु वंश के श्रेष्ठ, जब यदु वंश के चहेते कृष्ण पुत्र सांब को कुरु अन्यायपूर्ण रूप से परेशान कर रहे थे, तब उन्होंने उनके आक्रमण को उसी तरह बर्दाश्त नहीं किया जिस तरह एक सिंह क्षुद्र जीवों के हमले को बर्दाश्त नहीं करता।
O best of the Kurus, since Sāmba, the son of Kṛṣṇa, was being harassed by the Kurus in an unethical manner, that beloved son of the Yadu dynasty could not withstand their attacks, just as a lion cannot withstand the attacks of small animals.
तात्पर्य
अचिंत्यार्भ शब्द पर टिप्पणी करते हुए, श्रील प्रभुपाद कृष्ण में लिखते हैं: "यदु राजवंश का गौरवशाली पुत्र साम्बा, [सर्वोच्च व्यक्तित्वभगवान् कृष्ण] के पुत्र के रूप में अकल्पनीय क्षमताओं से संपन्न [था]।"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥