“भगवान बलराम विजयी होकर द्वारका पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात कई नागरिकों से हुई जो उनके भक्त और मित्र थे। जब वे सभी एकत्र हुए, तो भगवान बलराम ने विवाह की पूरी कहानी सुनाई, और वे इस बात से आश्चर्यचकित रह गए कि कैसे बलराम ने हस्तिनापुर शहर को कांपने पर मजबूर कर दिया था।”
