श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 68: साम्ब का विवाह  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  10.68.54 
अद्यापि च पुरं ह्येतत् सूचयद् रामविक्रमम् ।
समुन्नतं दक्षिणतो गङ्गायामनुद‍ृश्यते ॥ ५४ ॥
 
 
अनुवाद
आज भी हस्तिनापुर शहर की दक्षिणी दिशा गंगा नदी के किनारे ऊंची है, जो भगवान बलराम के पराक्रम का प्रमाण है।
 
Even today the city of Hastinapur is seen raised on the southern bank of the Ganga. In this way it is an indicator of the might of Lord Balarama.
तात्पर्य
श्रील प्रभुपाद ने इस प्रकार लिखा है: “अधिकांशतः क्षत्रिय राजाओं में विवाह से पहले दूल्हे और दुल्हन के समूहों के मध्य किसी प्रकार का युद्ध प्रारम्भ करने की प्रथा थी। जब सांबा ने लक्ष्मणा का अपहरण कर लिया, तो कुरु वंश के बुजुर्ग सदस्य यह देखकर प्रसन्न हुए कि वह वास्तव में लक्ष्मणा के लिए उपयुक्त वर है। हालाँकि, उनकी व्यक्तिगत शक्ति देखने के लिए, उन्होंने सांबा से युद्ध किया और युद्ध के नियमों का कोई सम्मान किए बिना, उन्होंने सांबा को गिरफ्तार कर लिया। जब यादव वंश ने कुरुओं के कारावास से सांबा को मुक्त करने का निर्णय लिया, तो भगवान बलराम स्वयं मामले को सुलझाने के लिए आए, और एक शक्तिशाली क्षत्रिय के रूप में, उन्होंने कुरुओं को सांबा को तुरंत मुक्त करने का आदेश दिया। कौरव इस आदेश से ऊपर से ही अपमानित हो गए, इसलिए उन्होंने भगवान बलराम की शक्ति को चुनौती दी। वे बस उन्हें अपनी अद्भुत शक्ति दिखाना चाहते थे। इस प्रकार बहुत खुशी के साथ उन्होंने अपनी पुत्री को सांबा को सौंप दिया, और पूरे मामले का निपटारा हो गया। दुर्योधन, अपनी पुत्री लक्ष्मणा के प्रति स्नेह के कारण, उसकी शादी पूरे वैभव से सांबा के साथ कर दी... बलराम कौरवों द्वारा अपने भव्य स्वागत से बहुत संतुष्ट हुए, और नवविवाहित जोड़े के साथ, वे अपनी राजधानी द्वारका की ओर चल पड़े।

“भगवान बलराम विजयी होकर द्वारका पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात कई नागरिकों से हुई जो उनके भक्त और मित्र थे। जब वे सभी एकत्र हुए, तो भगवान बलराम ने विवाह की पूरी कहानी सुनाई, और वे इस बात से आश्चर्यचकित रह गए कि कैसे बलराम ने हस्तिनापुर शहर को कांपने पर मजबूर कर दिया था।”

 
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध दस के अंतर्गत अठासठ अध्याय समाप्त होता है ।
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)