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श्रीमद् भागवतम
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स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ
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अध्याय 68: साम्ब का विवाह
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श्लोक 48
श्लोक
10.68.48
नमस्ते सर्वभूतात्मन् सर्वशक्तिधराव्यय ।
विश्वकर्मन् नमस्तेऽस्तु त्वां वयं शरणं गता: ॥ ४८ ॥
अनुवाद
हे सर्व प्राणियों के आत्मन, हे समस्त शक्तियों के धारक, हे अखण्ड ब्रह्माण्ड के निर्माता, हम आपको प्रणाम करते हैं और प्रणाम करते हुए आपकी शरण लेते हैं।
O Soul of all beings, O possessor of all powers, O indestructible Creator of the universe, we bow to You and take refuge in You in obeisance.
तात्पर्य
कौरवों को साफ-साफ महसूस हो गया था कि उनके प्राण और भाग्य भगवान के हाथों में है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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