Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.68.46: हे हजारों सिरों वाले अनंत, अपनी लीला के रूप में आप इस पृथ्वी के गोले को अपने एक सिर पर उठाते हैं। अंत समय पर, आप पूरे ब्रह्मांड को अपने शरीर में समाहित कर लेते हैं और अकेले रहकर विश्राम के लिए लेट जाते हैं। | bhagavat अध्याय 10.68: साम्ब का विवाह । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे हजारों सिरों वाले अनंत, अपनी लीला के रूप में आप इस पृथ्वी के गोले को अपने एक सिर पर उठाते हैं। अंत समय पर, आप पूरे ब्रह्मांड को अपने शरीर में समाहित कर लेते हैं और अकेले रहकर विश्राम के लिए लेट जाते हैं।
O thousand-headed Ananta, as Your lila (leela), You hold the whole world on Your one head. At the time of destruction, You absorb the entire universe within Your body and lie down to rest, remaining alone.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥