श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती बताते हैं कि भगवान की इच्छा से उनका हल आकार में बढ़ गया था और जब बलराम हस्तिनापुर को पानी की ओर घसीटने लगे, तो उन्होंने गंगा नदी को आदेश दिया, "साँबा को छोड़कर, तुम्हें अपने पानी से नगर के सभी लोगों पर हमला करना चाहिए और उन्हें मार डालना चाहिए।" इस प्रकार उन्होंने कौरवों से पृथ्वी को मुक्त करने के अपने वादे को पूरा किया, जबकि यह सुनिश्चित किया कि साँबा को कुछ भी न हो।
