श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 68: साम्ब का विवाह  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  10.68.41 
लाङ्गलाग्रेण नगरमुद्विदार्य गजाह्वयम् ।
विचकर्ष स गङ्गायां प्रहरिष्यन्नमर्षित: ॥ ४१ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान् ने क्रोधित होकर अपने हल की नोक से हस्तिनापुर को उखाड़ लिया और पूरे नगर को गंगा नदी में फेंकने का विचार करके उसे घसीटने लगे।
 
In anger, the Lord uprooted Hastinapur with the tip of his plough and began dragging the entire city with the intention of throwing it into the river Ganga.
तात्पर्य
श्रील प्रभुपाद इस प्रकार लिखते हैं: "भगवान बलराम इतने क्रोधित लग रहे थे कि ऐसा प्रतीत हो रहा था कि वे सृष्टि को जलाकर राख कर सकते हैं। वह दृढ़ता के साथ खड़े हुए और अपना हल उठाकर पृथ्वी पर प्रहार करने लगे। इस प्रकार हस्तिनापुर नगर पृथ्वी से अलग हो गया। भगवान बलराम ने तब नगर को गंगा नदी के बहते पानी की ओर घसीटा। इस वजह से हस्तिनापुर में भूकंप जैसा कंपन हुआ, और ऐसा लग रहा था कि पूरा नगर तहस-नहस हो जाएगा।"

श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती बताते हैं कि भगवान की इच्छा से उनका हल आकार में बढ़ गया था और जब बलराम हस्तिनापुर को पानी की ओर घसीटने लगे, तो उन्होंने गंगा नदी को आदेश दिया, "साँबा को छोड़कर, तुम्हें अपने पानी से नगर के सभी लोगों पर हमला करना चाहिए और उन्हें मार डालना चाहिए।" इस प्रकार उन्होंने कौरवों से पृथ्वी को मुक्त करने के अपने वादे को पूरा किया, जबकि यह सुनिश्चित किया कि साँबा को कुछ भी न हो।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)