Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.68.32-33: “ओह! धीरे धीरे करके ही मैं क्रुद्ध यदुजनों और प्रभु कृष्ण, जो क्रोधित हो चुके थे, को शान्त कर पाया। इन कौरवों के लिए शांति की इच्छा कर मैं यहाँ आया। किन्तु ये इतने मूर्ख, स्वभाव से कलह-प्रिय और दुष्ट हैं कि उन्होंने बारम्बार मेरा अनादर किया है। घमंड से भरे होने के कारण इन लोगों ने मेरे साथ कटु वचन कहने का दुस्साहस किया है!” | bhagavat अध्याय 10.68: साम्ब का विवाह । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
“ओह! धीरे धीरे करके ही मैं क्रुद्ध यदुजनों और प्रभु कृष्ण, जो क्रोधित हो चुके थे, को शान्त कर पाया। इन कौरवों के लिए शांति की इच्छा कर मैं यहाँ आया। किन्तु ये इतने मूर्ख, स्वभाव से कलह-प्रिय और दुष्ट हैं कि उन्होंने बारम्बार मेरा अनादर किया है। घमंड से भरे होने के कारण इन लोगों ने मेरे साथ कटु वचन कहने का दुस्साहस किया है!”
“Oh! I was able to calm down the enraged Yadus and also Krishna who was furious, gradually. I came here wishing for peace for these Kauravas. But they are so foolish, quarrelsome and wicked by nature that they have repeatedly disrespected me. Due to arrogance, they have dared to speak harsh words to me.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥