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bhagavat 10.68.25: क्योंकि ये वृष्णि लोग वैवाहिक संबंधों के द्वारा हमसे जुड़े हैं, इसीलिए हमने इन्हें अपनी शय्या, आसन और भोजन में समान अधिकार दे रखा है। सच तो यह है कि हमने ही इन्हें राज-सिंहासन प्रदान किया है।   |   bhagavat अध्याय 10.68: साम्ब का विवाह   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 68: साम्ब का विवाह  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  10.68.25 
एते यौनेन सम्बद्धा: सहशय्यासनाशना: ।
वृष्णयस्तुल्यतां नीता अस्मद्दत्तनृपासना: ॥ २५ ॥
 
 
अनुवाद
क्योंकि ये वृष्णि लोग वैवाहिक संबंधों के द्वारा हमसे जुड़े हैं, इसीलिए हमने इन्हें अपनी शय्या, आसन और भोजन में समान अधिकार दे रखा है। सच तो यह है कि हमने ही इन्हें राज-सिंहासन प्रदान किया है।
 
Since these Vrishnis are bound to us by matrimonial relations, we have given them equal status in our beds, seats and food. In fact, we have given them the throne of the kingdom.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)