श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 68: साम्ब का विवाह  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  10.68.20 
बन्धून् कुशलिन: श्रुत्वा पृष्ट्वा शिवमनामयम् ।
परस्परमथो रामो बभाषेऽविक्लवं वच: ॥ २० ॥
 
 
अनुवाद
जब दोनों पक्षों ने एक दूसरे के रिश्तेदारों की कुशल-मंगल की बातें सुनीं और एक-दूसरे के स्वास्थ्य की सुध ली तो बलराम जी ने सीधे ही कौरवों से इस प्रकार बात कही।
 
When both the parties heard that their relatives were well and both had enquired about each other's well-being and health, then Balarama spoke directly to the Kurus in this manner.
तात्पर्य
श्रील प्रभुपाद लिखते हैं: "उन्होंने एक दूसरे का कुशलक्षेम पूछकर स्वागत-वचन का आदान-प्रदान किया, और जब यह औपचारिकता समाप्त हो गई, तो भगवान बलराम ने अपने विस्तृत स्वर और बड़े धैर्य के साथ उन लोगों के विचार हेतु निम्नलिखित शब्द प्रस्तुत किये।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)