सोऽभिवन्द्याम्बिकापुत्रं भीष्मं द्रोणं च बाह्लिकम् ।
दुर्योधनं च विधिवद् राममागतमब्रवीत् ॥ १७ ॥
अनुवाद
अम्बिका-पुत्र (धृतराष्ट्र) और भीष्म, द्रोण, बाह्लिक और दुर्योधन को यथावत सम्मान देने के बाद उद्धव ने उन्हें बताया कि भगवान बलराम आ गये हैं।
After giving due respect to Ambika's son (Dhritarashtra) as well as Bhishma, Drona, Bahlik and Duryodhana, Uddhava told them that Lord Balarama has arrived.
तात्पर्य
श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती का कहना है कि यहाँ उद्धव द्वारा युधिष्ठिर और उनके साथियों को सम्मान करने के कोई प्रमाण नहीं है, क्योंकि उस समय पाण्डव इन्द्रप्रस्थ में रह रहे थे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥