Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.67.22: इस प्रकार भगवान से युद्ध करते हुए द्विविद जिस-जिस वृक्ष से भगवान पर हमला करता, वह बार-बार उसी तरह से नष्ट हो जाता। तभी उसने चारों ओर से वृक्षों को उखाड़ना शुरू कर दिया और तब तक उखाड़ता रहा जब तक कि पूरा जंगल वृक्षविहीन नहीं हो गया। | bhagavat अध्याय 10.67: बलराम द्वारा द्विविद वानर का वध । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं युध्यन् भगवता भग्ने भग्ने पुन: पुन: ।
आकृष्य सर्वतो वृक्षान् निर्वृक्षमकरोद् वनम् ॥ २२ ॥
अनुवाद
इस प्रकार भगवान से युद्ध करते हुए द्विविद जिस-जिस वृक्ष से भगवान पर हमला करता, वह बार-बार उसी तरह से नष्ट हो जाता। तभी उसने चारों ओर से वृक्षों को उखाड़ना शुरू कर दिया और तब तक उखाड़ता रहा जब तक कि पूरा जंगल वृक्षविहीन नहीं हो गया।
In this manner, while Dwivid was fighting with the Lord, every tree with which he attacked the Lord was repeatedly destroyed, and he kept uprooting trees from all sides until the forest became treeless.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥