श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 66: पौण्ड्रक—छद्म वासुदेव  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  10.66.9 
मुखं तदपिधायाज्ञ कङ्कगृध्रवटैर्वृत: ।
शयिष्यसे हतस्तत्र भविता शरणं शुनाम् ॥ ९ ॥
 
 
अनुवाद
“रे मूर्ख! जब तू मर जाएगा, तो तेरा मुँह गिद्धों, चीलों और बट पक्षियों से ढका रहेगा। और तू कुत्तों का आश्रय-स्थल बनेगा।”
 
"You fool! When you are killed and your face is covered by vultures, kites and vultures, you will become a shelter for dogs."
तात्पर्य
पौण्ड्रक ने भगवान को मूर्खतावश अपने शरण में आने को कहा था, लेकिन भगवान कृष्ण ने उसे कहा, "तुम मेरा आश्रय नहीं हो बल्कि तुम कुत्तों के लिए शरण बनोगे, जो तुम्हारे मृत शरीर को बड़े चाव से खाएंगे।"

श्रील प्रभुपाद ने इस दृश्य को इस प्रकार वर्णन किया है: "[भगवान कृष्ण ने पाण्ड्रक से कहा, "जब मैं तुम्हें नष्ट कर दूँगा,] मूर्ख राजा, तब तुमको अपना चेहरा शर्म से छिपाना पड़ेगा और जब मेरी चक्र से तुम्हारा सिर तुम्हारे शरीर से कट जाएगा, तो तुम गिद्ध, बाज और चील जैसे मांस खाने वाले पक्षियों से घिरे रहोगे। उस समय, तुम मेरे शरण बनने के बजाय, इन नीच पक्षियों की दया पर निर्भर रहोगे। उस समय तुम्हारा शरीर कुत्तों के लिए फेंक दिया जाएगा, जो उसे बड़े चाव से खाएंगे।'"

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)