श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 66: पौण्ड्रक—छद्म वासुदेव  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  10.66.15 
द‍ृष्ट्वा तमात्मनस्तुल्यं वेषं कृत्रिममास्थितम् ।
यथा नटं रङ्गगतं विजहास भृशं हरि: ॥ १५ ॥
 
 
अनुवाद
जब राजा ने ठीक भगवान् हरि की तरह ही अपना वेश बना लिया था, बिल्कुल वैसा ही जैसा कोई मंच पर अभिनेता करता है, तो यह देखकर भगवान् हरि बहुत हँसे।
 
When Lord Hari saw that the King had disguised himself just as an actor does on the stage, He laughed heartily.
तात्पर्य
श्रील प्रभुपाद इस दृश्य का वर्णन इस प्रकार करते हैं: ''कुल मिलाकर, [पौंड्रक का] वेश और सजावट स्पष्ट रूप से नकली थी। कोई भी देख सकता था कि वह मंच पर किसी ऐसे व्यक्ति की तरह था जो झूठे कपड़ों में वासुदेव की भूमिका निभा रहा हो। जब भगवान श्री कृष्ण ने पौंड्रक को उनके आसन और वेश की नकल करते देखा, तो वे अपनी हँसी नहीं रोक सके, और इस तरह वे बहुत संतुष्टि के साथ हँसे।''

श्रील जीव गोस्वामी बताते हैं कि यह भगवान शिव का आशीर्वाद था जिसने पौंड्रक को भगवान के वेश और रूप की हूबहू नकल करने में सक्षम किया - श्री पद्म पुराण के उत्तर-खंड से प्राप्त एक तथ्य।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)