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bhagavat 10.65.30: [शुकदेव गोस्वामी ने कहा] : तब बलराम ने यमुना नदी को छोड़ दिया और जैसे हाथियों का राजा हथिनी के झुंड के साथ जल में प्रवेश करता है, उसी प्रकार वे अपनी संगिनियों के साथ नदी के जल में प्रवेश कर गए।   |   bhagavat अध्याय 10.65: बलराम का वृन्दावन जाना   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 65: बलराम का वृन्दावन जाना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  10.65.30 
ततो व्यमुञ्चद् यमुनां याचितो भगवान् बल: ।
विजगाह जलं स्‍त्रीभि: करेणुभिरिवेभराट् ॥ ३० ॥
 
 
अनुवाद
[शुकदेव गोस्वामी ने कहा] : तब बलराम ने यमुना नदी को छोड़ दिया और जैसे हाथियों का राजा हथिनी के झुंड के साथ जल में प्रवेश करता है, उसी प्रकार वे अपनी संगिनियों के साथ नदी के जल में प्रवेश कर गए।
 
[Śukadeva Gosvāmī said] : Then Balarama left the Yamuna and entered the water of the river along with his companions, just as a king of elephants enters the water with his herd of female elephants.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)