श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 65: बलराम का वृन्दावन जाना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  10.65.27 
एवं निर्भर्त्सिता भीता यमुना यदुनन्दनम् ।
उवाच चकिता वाचं पतिता पादयोर्नृप ॥ २७ ॥
 
 
अनुवाद
[शुकदेव गोस्वामी आगे कहते हैं कि] : हे राजन! बलराम द्वारा इस प्रकार फटकारे जाने पर डरी हुई यमुना नदी की देवी आईं और यदुवंशियों के आनंद श्री बलराम के चरणों में गिर पड़ीं। कांपते हुए उन्होंने उनसे निम्नलिखित शब्द कहे।
 
[Sukadeva Goswami said] : O King, frightened by Balarama's rebuke, Yamunadevi came and fell at the feet of Yadunandana Balarama. Trembling, she said the following words to him.
तात्पर्य
श्रील जीव गोस्वामी के अनुसार, भगवान बलराम के समक्ष प्रकट हुई देवी, श्रीमती कालिंदी का विस्तार हैं, जो द्वारका में भगवान कृष्ण की एक रानी हैं। श्रील जीव गोस्वामी उन्हें कालिंदी की "छाया" कहते हैं, और श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती इस बात की पुष्टि करते हैं कि वह स्वयं कालिंदी नहीं, बल्कि कालिंदी का विस्तार हैं। श्रील जीव गोस्वामी श्री हरि-वंश से भी प्रमाण देते हैं - "प्रत्युवाचारणव-वधूम" कथन में - कि देवी यमुना समुद्र की पत्नी हैं। इसलिए हरि-वंश उन्हें "सागरंगना" के रूप में भी संदर्भित करता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)