वरुणप्रेषिता देवी वारुणी वृक्षकोटरात् ।
पतन्ती तद् वनं सर्वं स्वगन्धेनाध्यवासयत् ॥ १९ ॥
अनुवाद
देवता वरुण के आदेश से भेजी गई दिव्य वारुणी मदिरा पेड़ के खोखलेपन से बहने लगी और अपनी सुगंधित गंध से पूरे जंगल को और भी सुगंधित बना दिया।
The divine Varuni wine sent by Lord Varuna flowed out from a hollow hole in a tree and made the whole forest more fragrant with its sweet smell.
तात्पर्य
श्रील श्रीधर स्वामी जी बताते हैं कि वारुणी, शहद से बनाई गई शराब होती है। श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती कहते हैं कि देवी वारुणी, जो कि वरुण जी की पुत्री हैं, उस विशेष तरह के देवी शराब की अध्यक्ष होती हैं। आचार्य ने श्री हरिवंश से इस तरह का कथन भी उद्धृत किया है: "समीपं प्रेषिता पित्रा वरुणेन तवांघा।" यहाँ देवी वारुणी ने भगवान बलराम से कहा है: "हे पापरहित, मेरे पिता, वरुण, ने मुझे आपके पास भेजा है।"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥