Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.64.31: तब देवकीपुत्र, परिपूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् श्रीकृष्ण जो ब्राह्मणों के प्रति विशेष रूप से अनुरक्त हैं और जो स्वयं धर्म के सार हैं, अपने निजी संगियों से बोले और इस प्रकार राजाओं को शिक्षा प्रदान की। | bhagavat अध्याय 10.64: राजा नृग का उद्धार । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कृष्ण: परिजनं प्राह भगवान् देवकीसुत: ।
ब्रह्मण्यदेवो धर्मात्मा राजन्याननुशिक्षयन् ॥ ३१ ॥
अनुवाद
तब देवकीपुत्र, परिपूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् श्रीकृष्ण जो ब्राह्मणों के प्रति विशेष रूप से अनुरक्त हैं और जो स्वयं धर्म के सार हैं, अपने निजी संगियों से बोले और इस प्रकार राजाओं को शिक्षा प्रदान की।
Then the Supreme Personality of Godhead, Krishna, the son of Devaki, who is especially fond of the brahmanas and who is the very essence of religion, spoke to His personal associates and thus taught the royal class.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥