Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.64.19-20: इस स्थिति में अपने आप को कर्तव्य के भयंकर संकट में पाकर मैंने दोनों ब्राह्मणों से विनती की, "मैं इस गाय के बदले एक लाख उत्तम गायें दूँगा। कृपया उस गाय को वापस कर दें। आप अपने सेवक मुझ पर दया करें। मैं नहीं जानता था कि मैं क्या कर रहा था। मुझे इस कठिन स्थिति से बचा लें, नहीं तो निश्चित रूप से मैं नर्क में गिरूंगा।" | bhagavat अध्याय 10.64: राजा नृग का उद्धार । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस स्थिति में अपने आप को कर्तव्य के भयंकर संकट में पाकर मैंने दोनों ब्राह्मणों से विनती की, "मैं इस गाय के बदले एक लाख उत्तम गायें दूँगा। कृपया उस गाय को वापस कर दें। आप अपने सेवक मुझ पर दया करें। मैं नहीं जानता था कि मैं क्या कर रहा था। मुझे इस कठिन स्थिति से बचा लें, नहीं तो निश्चित रूप से मैं नर्क में गिरूंगा।"
In this situation, finding myself in a grave dilemma of duty, I implored the two Brahmins, “I will give one lakh excellent cows in exchange for this cow. Kindly return it to me. Be kind to me, your servant. I was unaware of what I was doing. Save me from this difficult situation, otherwise I will surely fall into the filthy hell.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥