तां नीयमानां तत्स्वामी दृष्ट्वोवाच ममेति तम् ।
ममेति परिग्राह्याह नृगो मे दत्तवानिति ॥ १७ ॥
अनुवाद
जब गाय के पहले मालिक ने गाय को उठाकर ले जाते हुए देखा, तो उसने कहा, "वह मेरी है!" दूसरे ब्राह्मण, जिसने उसे उपहार के रूप में स्वीकार किया था, ने उत्तर दिया, "नहीं, वह मेरी है! उसे नृग ने मुझे दे दी थी।"
When the first owner of the cow saw it being taken away, he said, "It is mine." The other brahmin who had accepted it as a gift replied, "No, it is mine. Nriga gave it to me."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥