कस्यचिद् द्विजमुख्यस्य भ्रष्टा गौर्मम गोधने ।
सम्पृक्ताविदुषा सा च मया दत्ता द्विजातये ॥ १६ ॥
अनुवाद
एक बार एक श्रेष्ठ ब्राह्मण की गाय भटककर मेरे झुंड में आ गई। इस बात से अनजान मैं उसे दूसरे ब्राह्मण को दान में दे दिया।
Once a cow belonging to a noble Brahmin strayed and joined my herd. Being unaware of this, I donated that cow to another Brahmin.
तात्पर्य
श्रील श्रीधर स्वामी जी समझाते हैं कि यहाँ "द्विज-मुखय", "प्रथम श्रेणी का ब्राह्मण" शब्द उस ब्राह्मण को इंगित करता है जिसने दान स्वीकार करना बंद कर दिया है और इस प्रकार जो उस गाय के बदले में एक लाख गायों को भी स्वीकार करने से इनकार कर देगा जिसे अनुचित रूप से दे दिया गया था।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥