विष्णुज्वर के सामर्थ्य से हारकर शिवज्वर दुःख से कराह उठा। किंतु कहीं भी आश्रय न पाकर भयभीत शिवज्वर इंद्रियों के ईश्वर भगवान कृष्ण के समक्ष उनकी शरण पाने की आशा से आया। इस प्रकार दोनों हाथ जोड़कर उसने भगवान की स्तुति शुरू की।
Defeated by the power of Vishnujwar, Shivjwar screamed in pain. But being unable to find shelter anywhere, Shivjwar, frightened, came to Lord Krishna, the Lord of the senses, hoping to seek refuge. Thus, he started praising Him with folded hands.
तात्पर्य
जैसा कि श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ने बताया है, यह महत्वपूर्ण है कि शिव-ज्वर को अपने स्वामी, भगवान शिव का साथ छोड़ना पड़ा और सीधे परम भगवान, भगवान कृष्ण का आश्रय लेना पड़ा।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥