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bhagavat 10.63.23: जब भगवान नारायण ने मानव रूप में इस अस्त्र को पास आते देखा, तो उन्होंने अपना व्यक्तिगत ज्वर अस्त्र, विष्णु ज्वर छोड़ दिया। इस तरह से शिव ज्वर और विष्णु ज्वर एक-दूसरे से युद्ध करने लगे।   |   bhagavat अध्याय 10.63: बाणासुर और भगवान् कृष्ण का युद्ध   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 63: बाणासुर और भगवान् कृष्ण का युद्ध  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  10.63.23 
अथ नारायण: देव: तं द‍ृष्ट्वा व्यसृजज्ज्वरम् ।
माहेश्वरो वैष्णवश्च युयुधाते ज्वरावुभौ ॥ २३ ॥
 
 
अनुवाद
जब भगवान नारायण ने मानव रूप में इस अस्त्र को पास आते देखा, तो उन्होंने अपना व्यक्तिगत ज्वर अस्त्र, विष्णु ज्वर छोड़ दिया। इस तरह से शिव ज्वर और विष्णु ज्वर एक-दूसरे से युद्ध करने लगे।
 
Thereafter, seeing this weapon coming near, Lord Narayana released his personal fever weapon, Vishnujvara. In this way Shivajwar and Vishnujwar started fighting with each other.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)