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bhagavat 10.63.12: त्रिशूलधारी भगवान शिव ने शार्ङ्ग धनुष धारण करने वाले भगवान कृष्ण पर ढेरों हथियार चलाए। हालाँकि, भगवान कृष्ण ज़रा भी विचलित नहीं हुए - उन्होंने उचित प्रति-हथियारों का उपयोग करके इन सभी हथियारों को निष्प्रभावी बना दिया।   |   bhagavat अध्याय 10.63: बाणासुर और भगवान् कृष्ण का युद्ध   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 63: बाणासुर और भगवान् कृष्ण का युद्ध  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  10.63.12 
पृथग्विधानि प्रायुङ्क्त पिणाक्यस्‍त्राणि शार्ङ्गिणे ।
प्रत्यस्‍त्रै: शमयामास शार्ङ्गपाणिरविस्मित: ॥ १२ ॥
 
 
अनुवाद
त्रिशूलधारी भगवान शिव ने शार्ङ्ग धनुष धारण करने वाले भगवान कृष्ण पर ढेरों हथियार चलाए। हालाँकि, भगवान कृष्ण ज़रा भी विचलित नहीं हुए - उन्होंने उचित प्रति-हथियारों का उपयोग करके इन सभी हथियारों को निष्प्रभावी बना दिया।
 
Trishul wielding Shiva fired several weapons at Sarnga wielding bow wielding Krishna. But Krishna was not perturbed at all—he neutralized all these weapons with appropriate counter-weapons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)