Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.63.10-11: अपने शार्ङ्ग धनुष से तीखे नोक वाले तीर छोड़ते हुए भगवान कृष्ण ने भगवान शिव के विभिन्न अनुयायियों—भूतों, प्रमथों, गुह्यकों, डाकिनियों, यातुधानों, वेताल, विनायकों, प्रेतों, मातृकाओं, पिशाचों, कुष्मांडों और ब्रह्म-राक्षसों को दूर भगा दिया। | bhagavat अध्याय 10.63: बाणासुर और भगवान् कृष्ण का युद्ध । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शङ्करानुचरान् शौरिर्भूतप्रमथगुह्यकान् ।
डाकिनीर्यातुधानांश्च वेतालान् सविनायकान् ॥ १० ॥
प्रेतमातृपिशाचांश्च कुष्माण्डान् ब्रह्मराक्षसान् ।
द्रावयामास तीक्ष्णाग्रै: शरै: शार्ङ्गधनुश्च्युतै: ॥ ११ ॥
अनुवाद
अपने शार्ङ्ग धनुष से तीखे नोक वाले तीर छोड़ते हुए भगवान कृष्ण ने भगवान शिव के विभिन्न अनुयायियों—भूतों, प्रमथों, गुह्यकों, डाकिनियों, यातुधानों, वेताल, विनायकों, प्रेतों, मातृकाओं, पिशाचों, कुष्मांडों और ब्रह्म-राक्षसों को दूर भगा दिया।
Releasing sharp-pointed arrows from His Sharanga bow, Lord Krishna drove away all of Lord Shiva's various attendants -- the ghosts, Pramathas, Guhyakas, Dakinis, Yaatudhanas, Vetals, Vinayakas, pretas, mothers, ghosts, Kusmandas and Brahma-raksas.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥