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श्रीशुक उवाच
अपश्यतां चानिरुद्धं तद्बन्धूनां च भारत ।
चत्वारो वार्षिका मासा व्यतीयुरनुशोचताम् ॥ १ ॥
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा: हे भारत, अनिरुद्ध के परिजन उसे लौटते हुए ना देखकर दुःखी रहे और इस प्रकार वर्षा ऋतु के चार महीने बीत गए।
Sukadeva Goswami said: O Bharata, Aniruddha's relatives were grieved when they saw that he had not returned, and thus four months of the rainy season passed by.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥