वर्तमान समय में भौतिकवादी लोग इंद्रिय तृप्ति के लिए अभूतपूर्व सुविधाओं से प्रसन्न हैं। यद्यपि यह स्पष्ट है कि मृत्यु, व्यक्तिगत और सामूहिक दोनों, जल्दी से उन पर आ रही है, आधुनिक इंद्रिय तृप्त करने वाले अपने आसन्न विनाश के प्रति बेखबर हैं। जैसा कि भागवतम (2.1.4) में कहा गया है, पश्यन्न एपी न पश्यति: भले ही उनका आसन्न विनाश स्पष्ट है, वे इसे देखने के लिए बहुत अंधे हैं, भोग भोग और परिवार के प्रति आसक्ति के कारण नशे में हैं। इसी तरह, बाणासुर अपने भौतिक पराक्रम के नशे में धुत था और विश्वास नहीं कर सकता था कि वह आकार में कटने वाला है।
