श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 62: ऊषा-अनिरुद्ध मिलन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  10.62.8 
तच्छ्रुत्वा भगवान् क्रुद्ध: केतुस्ते भज्यते यदा ।
त्वद्दर्पघ्नं भवेन्मूढ संयुगं मत्समेन ते ॥ ८ ॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर शिवजी को क्रोध आ गया और उन्होंने कहा, "हे मूर्ख! जब तू मेरे समान किसी से युद्ध करेगा तब तेरी ध्वजा टूट जाएगी। उस युद्ध से तेरा घमंड नष्ट हो जाएगा।"
 
Hearing this, Lord Shiva became angry and said, “You fool! When you fight a person like me, your flag will break. Your pride will be destroyed by that fight.”
तात्पर्य
भगवान शिव बाणासुर को तुरंत दंडित कर सकते थे और व्यक्तिगत रूप से उसके अभिमान को नष्ट कर सकते थे, लेकिन चूंकि बाणासुर उनके इतने वफादार सेवक थे, शिव ने ऐसा नहीं किया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)