श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 62: ऊषा-अनिरुद्ध मिलन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  10.62.6 
दो:सहस्रं त्वया दत्तं परं भाराय मेऽभवत् ।
त्रिलोक्यां प्रतियोद्धारं न लभे त्वद‍ृते समम् ॥ ६ ॥
 
 
अनुवाद
आपने मुझे दी हुई ये एक हज़ार भुजाएँ मेरे लिए सिर्फ एक भारी बोझ हैं। तीनों लोकों में मैं आप के अलावा लड़ने लायक कोई नहीं पा रहा हूँ।
 
These thousand arms given by you have become a heavy burden for me. I am unable to find anyone in the three worlds who is capable of fighting except you.
तात्पर्य
आचार्यों के अनुसार, यहाँ बाणासुर का सूक्ष्म कथन यह है कि: "और इसलिए जब मैं आपको, भगवान शिव को हरा दूंगा, तब मेरी विश्व विजय पूरी हो जाएगी और युद्ध की मेरी इच्छा पूरी हो जाएगी।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)