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bhagavat 10.62.23-24: ऊषा ने श्रद्धापूर्वक सेवा द्वारा अनिरुद्ध की पूजा की। उसने अनिरुद्ध को मालाएं, सुगंधियां, धूप, दीपक, बैठने का स्थान आदि देकर उनकी पूजा की। उसने उन्हें पेय, सभी प्रकार के भोजन और मधुर शब्द भी चढ़ाए। इस तरह तरुणियों के कक्ष में छिपे रहते हुए अनिरुद्ध को समय बीतने का कोई ध्यान नहीं रहा। उनकी इंद्रियां ऊषा के प्रति अनुराग से बंध चुकी थीं। ऊषा का अनिरुद्ध के प्रति स्नेह निरंतर बढ़ता ही जा रहा था।   |   bhagavat अध्याय 10.62: ऊषा-अनिरुद्ध मिलन   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 62: ऊषा-अनिरुद्ध मिलन  »  श्लोक 23-24
 
 
श्लोक  10.62.23-24 
परार्ध्यवास:स्रग्गन्धधूपदीपासनादिभि: ।
पानभोजनभक्ष्यैश्च वाक्यै: शुश्रूषणार्चित: ॥ २३ ॥
गूढ: कन्यापुरे शश्वत्प्रवृद्धस्‍नेहया तया ।
नाहर्गणान् स बुबुधे ऊषयापहृतेन्द्रिय: ॥ २४ ॥
 
 
अनुवाद
ऊषा ने श्रद्धापूर्वक सेवा द्वारा अनिरुद्ध की पूजा की। उसने अनिरुद्ध को मालाएं, सुगंधियां, धूप, दीपक, बैठने का स्थान आदि देकर उनकी पूजा की। उसने उन्हें पेय, सभी प्रकार के भोजन और मधुर शब्द भी चढ़ाए। इस तरह तरुणियों के कक्ष में छिपे रहते हुए अनिरुद्ध को समय बीतने का कोई ध्यान नहीं रहा। उनकी इंद्रियां ऊषा के प्रति अनुराग से बंध चुकी थीं। ऊषा का अनिरुद्ध के प्रति स्नेह निरंतर बढ़ता ही जा रहा था।
 
Usha worshipped Aniruddha with devotional service by offering him precious clothes as well as garlands, perfumes, incense, lamps, seats etc. She also offered him drinks, all kinds of food and sweet words. Thus, while hiding in the young ladies' room, Aniruddha did not notice the passage of time because his senses were captivated by Usha. Usha's affection for him was constantly increasing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)