मनुजेषु च सा वृष्णीन् शूरमानकदुन्दुभिम् ।
व्यलिखद् रामकृष्णौ च प्रद्युम्नं वीक्ष्य लज्जिता ॥ १८ ॥
अनिरुद्धं विलिखितं वीक्ष्योषावाङ्मुखी ह्रिया ।
सोऽसावसाविति प्राह स्मयमाना महीपते ॥ १९ ॥
अनुवाद
हे राजन्, मानवों में से चित्रलेखा ने वृष्णियों के चित्र बनाए जिसमें शूरसेन, आनकदुन्दुभि, बलराम और कृष्ण शामिल थे। जब ऊषा ने प्रद्युम्न का चित्र देखा तो वह लजा गई और जब उसने अनिरुद्ध का चित्र देखा तो उलझन के कारण उसने अपना सिर नीचे झुका लिया। मुस्कुराते हुए, वह बोली, "यही है, यही है, वही है"।
O King, Chitralekha drew out from among the human beings the pictures of the Vrishnis, including Shurasena, Anakadundubhi, Balarama and Krishna. When Usha saw the picture of Pradyumna she was embarrassed and when she saw the picture of Aniruddha she bowed her head in confusion. She said smilingly, “This is it, this is it, he.”
तात्पर्य
श्रील विस्वनाथ चक्रवर्ती आगे की जानकारी देते हैं: जब ऊषा ने प्रद्युम्न का चित्र देखा तो वह शर्मिंदा हो गई क्योंकि उसे लगा, "यह तो मेरे ससुर हैं।" फिर उसने अपने प्रेमी अनिरुद्ध का चित्र देखा और खुशी से रोई।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥