श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 62: ऊषा-अनिरुद्ध मिलन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  10.62.16 
चित्रलेखोवाच
व्यसनं तेऽपकर्षामि त्रिलोक्यां यदि भाव्यते ।
तमानेष्ये नरं यस्ते मनोहर्ता तमादिश ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
चित्रलेखा बोली: मैं तुम्हारा दुःख दूर कर दूँगी। यदि तीनों लोकों में कहीं भी तुम्हारा भावी पति मिलेगा, तो मैं उसे जो तुम्हारा मन चुरा गया है, तुम्हारे पास ले आऊँगी। तुम बस मुझे बताओ कि वह कौन है।
 
Chitralekha said: I will relieve you of your anxiety. If I find him anywhere in the three worlds, I will bring this future husband who has stolen your heart. You tell me who he is.
तात्पर्य
मज़ेदार बात यह है कि चित्रलेखा नाम ड्रॉइंग या पेंटिंग की कला में कुशल व्यक्ति को दर्शाता है। चित्र का अर्थ है "उत्कृष्ट" या "रंगीन", और रेखा का अर्थ है "आरेखन या चित्रकला की कला"। चित्रलेखा, जैसा कि निम्नलिखित पद्य में वर्णित है, अब उसके नाम से दर्शायी गई प्रतिभा का उपयोग करेगी।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)