श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 60: रुक्मिणी के साथ कृष्ण का परिहास  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  10.60.56 
भ्रातुर्विरूपकरणं युधि निर्जितस्य
प्रोद्वाहपर्वणि च तद्वधमक्षगोष्ठ्याम् ।
दु:खं समुत्थमसहोऽस्मदयोगभीत्या
नैवाब्रवी: किमपि तेन वयं जितास्ते ॥ ५६ ॥
 
 
अनुवाद
जब युद्ध में पराजित होकर और विकृत हो जाने के बाद तुम्हारा भाई अनिरुद्ध के विवाह के दिन जुआ खेलते समय मारा गया तो तुम्हें असह्य दुख हुआ। फिर भी तुमने मुझसे अलग होने के भय से एक शब्द भी नहीं कहा। अपनी इस चुप्पी से तुमने मुझे जीत लिया है।
 
When your brother was defeated in battle, disfigured and killed while playing chess on the wedding day of Aniruddha, you suffered immense pain. Yet you did not say a single word to me for fear of being separated from me. You have won me over with your silence.
तात्पर्य
यहां भगवान कृष्ण एक ऐसी घटना का उल्लेख कर रहे हैं जो अगले अध्याय में बताई जाएगी। अतः रुक्मणि के साथ कृष्ण की बातें अनिरुद्ध के विवाह के बाद ही हुई होंगी।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)