Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.60.55: हे आदरणीय, मेरे सभी महलों में तुम्हारे जैसी प्रेम करने वाली दूसरी पत्नी मैं नहीं पा सकता। जब तुम्हारा विवाह होने वाला था, तो वहाँ इकट्ठा हुए सभी राजाओं की तुमने परवाह नहीं की और केवल इसलिए कि तुमने मेरे बारे में प्रामाणिक बातें सुनी थीं, तुमने अपना गोपनीय संदेश एक ब्राह्मण द्वारा मेरे पास भेजा। | bhagavat अध्याय 10.60: रुक्मिणी के साथ कृष्ण का परिहास । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे आदरणीय, मेरे सभी महलों में तुम्हारे जैसी प्रेम करने वाली दूसरी पत्नी मैं नहीं पा सकता। जब तुम्हारा विवाह होने वाला था, तो वहाँ इकट्ठा हुए सभी राजाओं की तुमने परवाह नहीं की और केवल इसलिए कि तुमने मेरे बारे में प्रामाणिक बातें सुनी थीं, तुमने अपना गोपनीय संदेश एक ब्राह्मण द्वारा मेरे पास भेजा।
O most revered one, I cannot find a wife as loving as you in all my residences. When you were about to be married, you did not care about the many kings who had gathered to marry you, and because you had heard only authentic things about me, you sent your secret message to me through a Brahmin.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥