श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 60: रुक्मिणी के साथ कृष्ण का परिहास  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  10.60.52 
ये मां भजन्ति दाम्पत्ये तपसा व्रतचर्यया ।
कामात्मानोऽपवर्गेशं मोहिता मम मायया ॥ ५२ ॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि मैं आध्यात्मिक मुक्ति प्रदान करने की शक्ति रखता हूँ, लेकिन कामना-वासना से भरे लोग अपने सांसारिक जीवन में सुख पाने की इच्छा से तपस्या और व्रतों से मेरी पूजा करते हैं। ऐसे लोग मेरी मायावी शक्ति के जाल में फंसे रहते हैं।
 
Although I have the power to grant spiritual liberation, materialistic people worship Me by performing austerities and fasting to obtain My blessings for their materialistic domestic life. Such people are bewildered by My illusory power.
तात्पर्य
दंपत्ये शब्द पति-पत्नी के संबंधों को इंगित करता है। वासनापूर्ण और भ्रमित लोग इस रिश्ते को बढ़ाने के लिए सर्वोच्च भगवान की पूजा करते हैं, हालांकि वे जानते हैं कि वह उन्हें अस्थायी चीजों के प्रति उनके बेकार लगाव से मुक्त कर सकते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)