Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.60.48: कुलटा स्त्री का मन हमेशा नए प्रेमियों के लिए ललचाता रहता है, चाहे उसकी शादी हो या नहीं। बुद्धिमान इंसान को ऐसी नीच पत्नी को अपने साथ नहीं रखना चाहिए। यदि वह रखेगा, तो उसे इस जन्म और अगले जन्म में भाग्य का साथ नहीं मिलेगा। | bhagavat अध्याय 10.60: रुक्मिणी के साथ कृष्ण का परिहास । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुलटा स्त्री का मन हमेशा नए प्रेमियों के लिए ललचाता रहता है, चाहे उसकी शादी हो या नहीं। बुद्धिमान इंसान को ऐसी नीच पत्नी को अपने साथ नहीं रखना चाहिए। यदि वह रखेगा, तो उसे इस जन्म और अगले जन्म में भाग्य का साथ नहीं मिलेगा।
The mind of a promiscuous woman is always longing for new lovers, even if she is married. A wise man should not keep such a promiscuous woman with him because if he does so, he will be deprived of good fortune in this life and the next.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥