श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 60: रुक्मिणी के साथ कृष्ण का परिहास  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  10.60.47 
नैवालीकमहं मन्ये वचस्ते मधुसूदन ।
अम्बाया एव हि प्राय: कन्याया: स्याद् रति: क्व‍‍चित् ॥ ४७ ॥
 
 
अनुवाद
हे मधु-सूदन, मैं तुम्हारे वचनों को असत्य नहीं मानती। अक्सर अविवाहित लड़कियां पुरुषों के प्रति आकर्षित हो जाती हैं, जैसे अम्बा हुई थी।
 
O Madhu-Sudan, I do not believe your words to be untrue. Often an unmarried girl gets attracted to a man, as happened with Amba.
तात्पर्य
भगवान श्री कृष्ण द्वारा कही गयी सारी बातों का खंडन करने के बाद, श्रीमती रुकमणी अब अपनी शालीनता की भावना के साथ, उनके कथनों की सच्चाई की प्रशंसा करती हैं। दूसरे शब्दों में, वह स्वीकार करती हैं कि भगवान कृष्ण ने सामान्य स्त्री मनोविज्ञान को समझाने के लिए उन्हें एक उदाहरण के रूप में उपयोग किया था। काशी के राजा की तीन बेटियाँ थीं - अम्बा, अंबालिका और अंबिका - और अम्बा शाल्वा की ओर आकर्षित थी। यह कहानी महाभारत में बताई गई है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)