श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 60: रुक्मिणी के साथ कृष्ण का परिहास  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  10.60.45 
त्वक्श्मश्रुरोमनखकेशपिनद्धमन्त-
र्मांसास्थिरक्तकृमिविट्कफपित्तवातम् ।
जीवच्छवं भजति कान्तमतिर्विमूढा
या ते पदाब्जमकरन्दमजिघ्रती स्‍त्री ॥ ४५ ॥
 
 
अनुवाद
ऐसी महिला जो आपके चरणकमलों के मधु की सुगंध का आनंद लेने से वंचित रह जाती है, वह पूरी तरह से बेवकूफ बन जाती है, और इस प्रकार वह अपनी ज़िंदगी को जीवित लाश के साथ इसी रूप में बिताती है, जो त्वचा, मूंछ, नाखून, बाल और शरीर के बालों से ढकी होती है और मांस, हड्डियों, रक्त, परजीवी, मल, बलगम, पित्त और वायु से भरी होती है।
 
A woman who is deprived of the taste of the honey-like fragrance of Your lotus feet becomes a total fool and accepts as her husband or lover a living corpse covered with skin, whiskers, nails, hair and fur and filled with flesh, bones, blood, insects, excreta, phlegm, bile and wind.
तात्पर्य
यहाँ भगवान कृष्ण की पवित्र पत्नी ने भौतिक शरीर पर आधारित विषयगत इन्द्रिय संतुष्टिकरण के बारे में बिल्कुल स्पष्ट बयान दिया है। श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ने इस छंद पर टिप्पणी इस प्रकार की है: "स वई पतिः स्याद् अकुटो-भयः स्वयम्" कथन के अनुसार - "वही वास्तव में तुम्हारा पति बनना चाहिए जो तुम्हारे सभी भय को दूर कर सके" - श्री कृष्ण सभी समयों में सभी महिलाओं के वास्तविक पति हैं। इस प्रकार जो महिला किसी और को अपने पति के रूप में पूजती है, वह केवल एक शव की पूजा करती है।

श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ने आगे टिप्पणी की: रुक्मिणी ने इसलिए माना कि यद्यपि भगवान कृष्ण के कमल चरणों की मिठास प्रसिद्ध है, और यद्यपि उनके पास ज्ञान और आनंद से भरा एक शाश्वत शरीर है, मूर्ख स्त्रियाँ उन्हें अस्वीकार कर देती हैं। एक सामान्य पति का शरीर बाहर से त्वचा और बालों से ढका होता है; अन्यथा, रक्त, मल, मांस, पित्त आदि से भरे होने के कारण, यह मक्खियों और अन्य कीटों से घिरा होता है जो इसकी दुर्गंध और अन्य आक्रामक गुणों से आकर्षित होते हैं।

जिन लोगों को कृष्ण या कृष्ण चेतना की सुंदरता और शुद्धता का कोई व्यावहारिक अनुभव नहीं है, वे भौतिक, शारीरिक संतुष्टि के इस तरह के अडिग निंदा से भ्रमित हो सकते हैं। लेकिन जो कृष्ण चेतना में प्रबुद्ध हैं, वे ऐसे बिल्कुल सत्य बयानों से उत्साहित और प्रफुल्लित होंगे।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)