श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ने आगे टिप्पणी की: रुक्मिणी ने इसलिए माना कि यद्यपि भगवान कृष्ण के कमल चरणों की मिठास प्रसिद्ध है, और यद्यपि उनके पास ज्ञान और आनंद से भरा एक शाश्वत शरीर है, मूर्ख स्त्रियाँ उन्हें अस्वीकार कर देती हैं। एक सामान्य पति का शरीर बाहर से त्वचा और बालों से ढका होता है; अन्यथा, रक्त, मल, मांस, पित्त आदि से भरे होने के कारण, यह मक्खियों और अन्य कीटों से घिरा होता है जो इसकी दुर्गंध और अन्य आक्रामक गुणों से आकर्षित होते हैं।
जिन लोगों को कृष्ण या कृष्ण चेतना की सुंदरता और शुद्धता का कोई व्यावहारिक अनुभव नहीं है, वे भौतिक, शारीरिक संतुष्टि के इस तरह के अडिग निंदा से भ्रमित हो सकते हैं। लेकिन जो कृष्ण चेतना में प्रबुद्ध हैं, वे ऐसे बिल्कुल सत्य बयानों से उत्साहित और प्रफुल्लित होंगे।
