श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 60: रुक्मिणी के साथ कृष्ण का परिहास  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  10.60.44 
तस्या: स्युरच्युत नृपा भवतोपदिष्टा:
स्‍त्रीणां गृहेषु खरगोश्वविडालभृत्या: ।
यत्कर्णमूलमरिकर्षण नोपयायाद्
युष्मत्कथा मृडविरिञ्चसभासु गीता ॥ ४४ ॥
 
 
अनुवाद
हे अच्युत कृष्ण, आपने जिन-जिन राजाओं के नाम लिये हैं उनमें से प्रत्येक राजा ऐसी महिला का पति बने, जिसके कानों ने कभी आपकी महिमा नहीं सुनी है। ऐसी स्त्रियाँ जो शिव और ब्रह्मा की सभाओं में गाए जाने वाले आपके गीतों से अनजान हैं। आख़िरकार ऐसी महिलाओं के घरों में ये राजा गधे, बैल, कुत्ते, बिल्ली और दास की तरह ही रहते हैं।
 
O Acyuta Krishna, may each of the kings you have named become the husband of a woman whose ears have never heard your glories sung in the assemblies of Shiva and Brahma. In any case, in the houses of such women these kings live like donkeys, bulls, dogs, cats and servants.
तात्पर्य
श्रील श्रीधर स्वामी के अनुसार, रानी रुक्मिणी के ये तीखे शब्द अध्याय के पाठ 10 में पाये गये भगवान कृष्ण के शुरुआती वक्तव्य के जवाब स्वरुप हैं। परम् प्रभु ने कहा था, "मेरी प्रिय राजकुमारी, आपकी इच्छा कई राजाओं ने की थी जो ग्रहों के शासकों के समान शक्तिशाली थे। वे सभी राजनीतिक प्रभाव, धन, सौंदर्य, उदारता और शारीरिक शक्ति से भरपूर थे।" श्रीधर स्वामी के अनुसार, रानी रुक्मिणी यहाँ गुस्से से बात करती हैं, अपनी तर्जनी भगवान की ओर उठाती हुई। वह तथाकथित महान राजकुमारों की गधों से तुलना करती हैं क्योंकि वे कई भौतिक बोझ उठाते हैं, बैलों से क्योंकि वे अपने व्यावसायिक कर्तव्यों का पालन करते हुए हमेशा व्यथित रहते हैं, कुत्तों से क्योंकि उनकी पत्नियाँ उनका अनादर करती हैं, बिल्लियों से क्योंकि वे स्वार्थी और क्रूर होते हैं, और दासों से क्योंकि वे पारिवारिक मामलों में दास होते हैं। ऐसे राजा एक मूर्ख महिला को वांछनीय लग सकते हैं जिसने श्री कृष्ण के गौरवों को न सुना हो या समझा न हो।

श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ने कहा कि ऐसे राजा गधों की तरह होते हैं क्योंकि उनकी पत्नियाँ कभी-कभी उन्हें लात मारती हैं, कुत्तों की तरह क्योंकि वे अपने घरों की रक्षा के लिए बाहरी लोगों के प्रति शत्रुतापूर्ण व्यवहार करते हैं, और बिल्लियों की तरह क्योंकि वे अपनी पत्नियों द्वारा छोड़े गए अवशेषों को खाते हैं।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)