आपको पाने की इच्छा से श्रेष्ठ राजा — अंग, वैन्य, जायंत, नहुष, गया और अन्य — अपना सर्वस्व त्याग कर आपकी खोज में जंगल में चले गये। हे कमल नयन, भला वे राजा इस दुनिया में निराश कैसे हो सकते हैं?
Desiring to attain Your proximity, Anga, Vanya, Jayanta, Nahusha, Gaya and other great kings abandoned their entire kingdoms and entered the forest to search for You. O lotus-eyed one, how can those kings be disappointed in this world?
तात्पर्य
यहँ रानी रुक्मिणी भगवान कृष्ण द्वारा पाठ 13 में प्रस्तुत विचारों का खंडन करती हैं। वास्तव में, श्रीमती रुक्मिणी-देवी भगवान कृष्ण के ही शब्दों को दोहराती हैं। भगवान ने कहा, āsthitāḥ padavīṁ su-bhru prāyaḥ sīdanti yoṣitaḥ: "जो महिलाएँ मेरे मार्ग का अनुसरण करती हैं, उन्हें आम तौर पर कष्ट भोगना पड़ता है।" यहाँ रुक्मिणी-देवी कहती हैं, sīdanti te ’nupadavīṁ ta ihāsthitāḥ kim: "जो आपके मार्ग पर अडिग हैं, उन्हें इस दुनिया में दुख क्यों उठाना चाहिए?" वह कई महान राजाओं का उदाहरण देती हैं जिन्होंने अपने शक्तिशाली प्रभुत्व का त्याग करके वन में प्रवेश किया, जहाँ उन्होंने तपस्याएँ कीं और भगवान की पूजा की, उनकी दिव्य संगति की तीव्र इच्छा रखी। इस प्रकार, श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती के अनुसार, श्रीमती रुक्मिणी-देवी यहाँ श्री कृष्ण से कहना चाहती हैं, "आपने कहा है कि मैं, एक राजा की बेटी, मूर्ख और निराश हूँ क्योंकि मैंने आपसे शादी की। लेकिन आप इन सभी महान प्रबुद्ध राजाओं पर मूर्ख होने का आरोप कैसे लगा सकते हैं? वे मनुष्यों में सबसे बुद्धिमान थे, फिर भी उन्होंने आपका अनुसरण करने के लिए सब कुछ त्याग दिया और निश्चित रूप से परिणाम से निराश नहीं थे। वास्तव में, उन्होंने आपके साथ की पूर्णता प्राप्त की।"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥