श्रीभगवानुवाच
मा मा वैदर्भ्यसूयेथा जाने त्वां मत्परायणाम् ।
त्वद्वच: श्रोतुकामेन क्ष्वेल्याचरितमङ्गने ॥ २९ ॥
अनुवाद
भगवान बोले: हे वैदर्भी, मुझसे नाराज़ मत हो। मुझे पता है कि तुम मुझमें पूरी तरह समर्पित हो। मैंने तो प्यारी देवी, मज़ाक में यह बात इसलिए कही थी क्योंकि मैं सुनना चाहता था कि तुम क्या कहोगी।
Bhagwan said: O Vaidarbhi, do not be angry with me. I know that you are completely devoted to me. O dear Devi, I said this jokingly because I wanted to hear what you would say.
तात्पर्य
श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती के अनुसार, भगवान कृष्ण ने यह श्लोक इसलिए कहा क्योंकि उन्हें लगा कि सुंदर रुक्मिणी को डर हो सकता है कि वह फिर से उसे परेशान करने के लिए कुछ कहेंगे या जो उन्होंने किया उससे वह नाराज़ हो सकती हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥