Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.60.23: अपने कोमल पैरों से, जो अपने लाल नाखूनों की चमक से चमक रहे थे, जमीन खोदने लगी और काजल के कारण काले पड़े अपने आँसुओं से कुमकुम से लाल हुए स्तनों को भिगो दिया। वे सिर झुकाकर खड़ी रहीं और अत्यधिक दुख से उनका गला रुँध गया। | bhagavat अध्याय 10.60: रुक्मिणी के साथ कृष्ण का परिहास । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अपने कोमल पैरों से, जो अपने लाल नाखूनों की चमक से चमक रहे थे, जमीन खोदने लगी और काजल के कारण काले पड़े अपने आँसुओं से कुमकुम से लाल हुए स्तनों को भिगो दिया। वे सिर झुकाकर खड़ी रहीं और अत्यधिक दुख से उनका गला रुँध गया।
She scratched the ground with her soft feet, with nails shining red, and drenched her breasts, reddened by the kumkum, with tears darkened by the kajal in her eyes. She stood with her face cast down and her voice was choked by extreme grief.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥