श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 60: रुक्मिणी के साथ कृष्ण का परिहास  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  10.60.18 
चैद्यशाल्वजरासन्धदन्तवक्रादयो नृपा: ।
मम द्विषन्ति वामोरु रुक्‍मी चापि तवाग्रज: ॥ १८ ॥
 
 
अनुवाद
हे सुन्दर जांघों वाली भद्रे, सम्राटों जैसे शिशुपाल, शाल्व, जरासंध तथा दन्तवक्र और तुम्हारे बड़े भाई रुक्मी भी मुझसे घृणा करते हैं।
 
O Bhadre with beautiful thighs, all the kings like Sisupala, Shalva, Jarasandha and Dantavakra hate me, and so does your elder brother Rukmi.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)