Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.60.13: हे सुकुमार भृकुटियों वाली नारी, जब स्त्रियाँ ऐसे पुरुषों के साथ रहती हैं जिनका व्यवहार अनिश्चित रहता है और जो समाज-स्वीकृत मार्ग का अनुसरण नहीं करते तो अक्सर उन्हें दुख उठाना पड़ता है। | bhagavat अध्याय 10.60: रुक्मिणी के साथ कृष्ण का परिहास । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे सुकुमार भृकुटियों वाली नारी, जब स्त्रियाँ ऐसे पुरुषों के साथ रहती हैं जिनका व्यवहार अनिश्चित रहता है और जो समाज-स्वीकृत मार्ग का अनुसरण नहीं करते तो अक्सर उन्हें दुख उठाना पड़ता है।
O one of beautiful eyebrows, women often have to suffer when they live with men whose conduct is erratic and who do not follow the socially accepted path.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥