चूँकि कृष्ण ने उस राक्षसी पूतना का स्तनपान किया था, इसतरह जब कृष्ण ने उसे मारा तो वह तुरन्त समस्त सांसारिक पापों से मुक्त हो गई। उसकी पाप-प्रतिक्रियाएँ स्वयं नष्ट हो गईं और इसलिए जब उसके विशाल शरीर को जलाया जा रहा था, तो उसके शरीर से निकलने वाला धुआँ सुगन्धित थी।
Since Krishna had breastfed the demoness Putana, when Krishna killed her, she was instantly freed from all material contamination. All her sins were automatically removed and so when her huge body was being burned, the smoke coming out of her body smelled like the fragrance of aguru.
तात्पर्य
कृष्ण चेतना के प्रभाव इस प्रकार हैं। यदि व्यक्ति किसी भी तरह से अपनी इंद्रियों को भगवान की सेवा में लगाकर कृष्ण चेतन बन जाता है, तो वह तुरंत भौतिक संदूषण से मुक्त हो जाता है। श्रृण्वतां स्व-कथाः कृष्णः पुण्य-श्रवण-कीर्तनः (भा. 1.2.17)। कृष्ण की गतिविधियों के बारे में सुनना शुद्ध जीवन की शुरुआत है। पुण्य-श्रवण-कीर्तनः: केवल सुनने और जप करने से ही व्यक्ति शुद्ध हो जाता है। इसलिए, भक्तिमय सेवा का निर्वहन करते हुए, श्रवण-कीर्तन (सुनना और जप करना) सबसे महत्वपूर्ण है। फिर, शुद्ध इंद्रियों के साथ, व्यक्ति भगवान की सेवा (हृषीकेण हृषीकेश-सेवनम) करना शुरू कर देता है। भक्तिर उच्यते: इसे भक्ति कहते हैं। जब पुतना किसी भी तरह से, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, अपने स्तन से उसे दूध पिलाकर भगवान की कुछ सेवा करने के लिए प्रेरित हुई, तो वह तुरंत शुद्ध हो गई, इतना ही नहीं जब उसके गंदे भौतिक शरीर को जला दिया गया, तो उससे अगरु की महक आई, जो सबसे अच्छी सुगंध वाली जड़ी-बूटी है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥