Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.59.44: इस प्रकार वे स्त्रियाँ लक्ष्मीपति को अपने पति के रूप में प्राप्त कर लेती हैं, हालाँकि ब्रह्मा जैसे बड़े देवता भी उनके पास पहुँचने का तरीका नहीं जानते। वे उनके प्रति निरंतर बढ़ते अनुराग का अनुभव करती हैं, उनसे मिलकर हँसती हैं और चुटकुले और स्त्रीत्व लज्जा से भरपूर ताज़ा अंतरंगता का आदान-प्रदान करती हैं। | bhagavat अध्याय 10.59: नरकासुर का वध । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस प्रकार वे स्त्रियाँ लक्ष्मीपति को अपने पति के रूप में प्राप्त कर लेती हैं, हालाँकि ब्रह्मा जैसे बड़े देवता भी उनके पास पहुँचने का तरीका नहीं जानते। वे उनके प्रति निरंतर बढ़ते अनुराग का अनुभव करती हैं, उनसे मिलकर हँसती हैं और चुटकुले और स्त्रीत्व लज्जा से भरपूर ताज़ा अंतरंगता का आदान-प्रदान करती हैं।
Thus those women obtained Lakshmi-pati as their husband although even the greatest of gods like Brahma did not know the way to reach him. They felt an ever-increasing affection for him, exchanged smiling glances with him and shared a fresh intimacy filled with laughter and womanly shyness.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥