भगवान् अच्युत को नमन करने, उनके चरणों में अपना मुकुट झुकाने और अपनी अभिलाषा पूरी करने के लिए उनसे याचना करने के पश्चात भी, महान देवता ने अपनी इच्छा पूर्ण होने पर सर्वोच्च प्रभु से युद्ध का निश्चय किया। देवताओं में कितनी अज्ञानता है! उन्हें अपनी संपन्नता पर लानत है!
Even after offering his obeisances to Lord Achyuta, touching His feet with the tips of his crown and begging the Lord to grant his wish, that great demigod wanted to quarrel with the Lord after his work was accomplished. What ignorance has befallen the demigods! Shame on their opulence.
तात्पर्य
यह सर्वविदित है कि सांसारिक सम्पति और अधिकार अहंकार को जन्म देते हैं और इस तरह एक समृद्ध जीवन अक्सर नर्क की ओर जाने वाला राजसी मार्ग हो सकता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥