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bhagavat 10.59.38-39: तत्पश्चात भगवान इन्द्र, देवताओं के राजा के लोक में गए और माता अदिति को उनके कुंडल प्रदान किए। वहाँ इन्द्र और उसकी पत्नी ने कृष्ण और उनकी प्रिय सत्यभामा की पूजा की। फिर सत्यभामा के आग्रह पर भगवान ने स्वर्गिक पारिजात वृक्ष को उखाड़ लिया और उसे गरुड़ की पीठ पर रख दिया। इन्द्र और अन्य सभी देवताओं को परास्त करने के बाद कृष्ण उस पारिजात को अपनी राजधानी ले आए।   |   bhagavat अध्याय 10.59: नरकासुर का वध   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 59: नरकासुर का वध  »  श्लोक 38-39
 
 
श्लोक  10.59.38-39 
गत्वा सुरेन्द्रभवनं दत्त्वादित्यै च कुण्डले ।
पूजितस्‍त्रिदशेन्द्रेण महेन्द्रय‍ाण्या च सप्रिय: ॥ ३८ ॥
चोदितो भार्ययोत्पाट्य पारिजातं गरुत्मति ।
आरोप्य सेन्द्रान् विबुधान् निर्जित्योपानयत्पुरम् ॥ ३९ ॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात भगवान इन्द्र, देवताओं के राजा के लोक में गए और माता अदिति को उनके कुंडल प्रदान किए। वहाँ इन्द्र और उसकी पत्नी ने कृष्ण और उनकी प्रिय सत्यभामा की पूजा की। फिर सत्यभामा के आग्रह पर भगवान ने स्वर्गिक पारिजात वृक्ष को उखाड़ लिया और उसे गरुड़ की पीठ पर रख दिया। इन्द्र और अन्य सभी देवताओं को परास्त करने के बाद कृष्ण उस पारिजात को अपनी राजधानी ले आए।
 
The Lord then went to Indra's house and presented Mother Aditi with His earrings. There Indra and his wife worshipped Krishna and his beloved Satyabhama. Then, at Satyabhama's request, the Lord uprooted the heavenly Paarijata tree and placed it on Garuda's back. After defeating Indra and all the other demigods, Krishna brought the Paarijata to His capital.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)